🥟🍮 औरंगाबाद की शान: दाल पिट्ठा और घेवर की पारंपरिक रेसिपी – आसान स्टेप बाय स्टेप विधि
❤️ "जहां स्वाद में बसी हो मिट्टी की खुशबू, वहां की रसोई में दाल पिट्ठा और घेवर बनते हैं त्योहार!"
बिहार का औरंगाबाद जिला न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां के लोकजीवन और व्यंजनों में भी गहराई है। यहां के पारंपरिक व्यंजन – दाल पिट्ठा और घेवर – सदियों से लोकपरंपरा का हिस्सा रहे हैं। चाहे तीज हो या सावन, छठ हो या पारिवारिक मिलन, इन दो व्यंजनों के बिना भोजन अधूरा लगता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि आप इन लाजवाब व्यंजनों को घर पर आसानी से कैसे बना सकते हैं।
🥟 दाल पिट्ठा – औरंगाबाद का देसी मोमोज़
📖 क्या है दाल पिट्ठा?
दाल पिट्ठा एक प्रकार का स्टीम्ड स्नैक है, जिसे चावल के आटे से बनाकर अंदर चना दाल की मसालेदार भरावन भरी जाती है। यह स्वाद में बेहतरीन, सेहत के लिए फायदेमंद और बिल्कुल बिना तेल का हेल्दी स्नैक है।
🧾 आवश्यक सामग्री:
बाहरी परत के लिए (चावल का आटा):
-
चावल का आटा – 2 कप
-
नमक – 1/2 चम्मच
-
गुनगुना पानी – आटा गूंथने के लिए
भरावन के लिए (दाल की स्टफिंग):
-
चना दाल – 1 कप (4-5 घंटे भीगी हुई)
-
अदरक – 1 इंच टुकड़ा
-
लहसुन – 4-5 कलियां
-
हरी मिर्च – 2
-
हींग – 1 चुटकी
-
जीरा – 1/2 चम्मच
-
हल्दी – 1/4 चम्मच
-
नमक – स्वादानुसार
-
लाल मिर्च – स्वादानुसार
-
सरसों का तेल – 1 चम्मच
👨🍳 बनाने की विधि (Step-by-Step):
1️⃣ चना दाल की भरावन तैयार करें:
-
भीगी हुई चना दाल को दरदरा पीस लें।
-
कढ़ाई में तेल गर्म करें, उसमें हींग और जीरा डालें।
-
अदरक, लहसुन और मिर्च का पेस्ट डालें और हल्का भूनें।
-
अब पिसी हुई दाल डालकर हल्दी, नमक, मिर्च डालें और धीमी आंच पर भूनें जब तक पानी सूख न जाए।
2️⃣ चावल का आटा गूंथना:
-
चावल के आटे में नमक मिलाएं।
-
गुनगुने पानी से नरम आटा गूंथें और 10 मिनट ढककर रखें।
3️⃣ पिट्ठा बनाना:
-
आटे की छोटी लोई लें, बेलकर पूड़ी बनाएं।
-
उसमें 1 चम्मच भरावन रखें और मोमोज़ की तरह या आधा चाँद जैसा मोड़कर सील करें।
4️⃣ स्टीम करना:
-
इडली कुकर या किसी भगोने में पानी उबालें।
-
पिट्ठों को प्लेट में रखें और 15–20 मिनट तक स्टीम करें।
5️⃣ परोसने का तरीका:
-
गर्मागर्म दाल पिट्ठा को टमाटर-धनिया की चटनी, सरसों की चटनी या नींबू अचार के साथ परोसें।
🍮 घेवर – मिठास से भरा औरंगाबाद का तीज स्पेशल
📖 घेवर क्या है?
घेवर एक पारंपरिक मिठाई है, जो आमतौर पर सावन और तीज जैसे त्योहारों पर बनाई जाती है। इसका क्रिस्पी जालीदार टेक्सचर, मिठास से भरी चाशनी और मेवे की सजावट इसे औरंगाबाद की रसोई में खास बनाते हैं।
🧾 सामग्री:
घेवर के लिए:
-
मैदा – 1 कप
-
घी – 1/4 कप
-
ठंडा पानी – 1/2 कप (बर्फ से ठंडा)
-
बर्फ के टुकड़े – घोल को ठंडा रखने के लिए
-
तलने के लिए घी या रिफाइंड ऑयल
चाशनी के लिए:
-
चीनी – 1 कप
-
पानी – 1/2 कप
-
इलायची पाउडर – 1/2 चम्मच
-
केसर – कुछ धागे
सजावट के लिए:
-
मावा (खोया) – 2 टेबलस्पून
-
कटे हुए ड्राई फ्रूट्स – बादाम, पिस्ता
-
चांदी का वर्क (optional)
👨🍳 घेवर बनाने की विधि (Step-by-Step):
1️⃣ घोल तैयार करें:
-
बर्फ ठंडे पानी में घी डालकर अच्छी तरह फेंटें।
-
अब उसमें मैदा मिलाकर पतला घोल तैयार करें।
2️⃣ तलना:
-
गहरे तले के बर्तन में घी या रिफाइंड गर्म करें।
-
ऊँचाई से थोड़ा-थोड़ा घोल डालें जिससे घेवर की जालीदार परतें बनें।
-
सुनहरा होने तक तलें और निकाल लें।
3️⃣ चाशनी तैयार करें:
-
पानी और चीनी को पकाकर एक तार की चाशनी बनाएं।
-
उसमें इलायची और केसर मिलाएं।
4️⃣ घेवर को चाशनी में डुबोएं:
-
तला हुआ घेवर थोड़ी देर चाशनी में रखें।
5️⃣ सजावट:
-
ऊपर से मावा, मेवे और चांदी का वर्क लगाएं।
📌 क्यों खास हैं औरंगाबाद के ये व्यंजन?
-
सांस्कृतिक पहचान: दाल पिट्ठा और घेवर औरंगाबाद के हर त्योहार और खास मौके का हिस्सा हैं।
-
सेहतमंद और स्वादिष्ट: बिना तेल के स्टीम्ड पिट्ठा और घर की बनी घेवर स्वास्थ्य और स्वाद का संगम है।
-
भावनात्मक जुड़ाव: ये व्यंजन मां-बेटी के साथ बनाए जाते हैं, परिवार को जोड़ते हैं और त्योहारों को यादगार बनाते हैं।
✍️ निष्कर्ष:
औरंगाबाद की रसोई में बसी हुई ये पारंपरिक खुशबू सिर्फ स्वाद नहीं, संस्कृति भी परोसती है। दाल पिट्ठा और घेवर जैसे व्यंजन पीढ़ियों को जोड़ते हैं और हर किचन में अपनापन भर देते हैं। तो इस बार त्योहार पर या छुट्टी के दिन, इन व्यंजनों को ज़रूर आज़माएं।

.jpg)
Comments
Post a Comment