कुट्टू के आटे की पूरी: व्रत का आदर्श भोजन
हिंदू धार्मिक परंपराओं में व्रत का विशेष महत्व है। नवरात्रि, एकादशी, शिवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर अन्न त्यागकर लोग फलाहार करते हैं। इन व्रतों में कुट्टू के आटे की पूरी एक लोकप्रिय और स्वादिष्ट व्यंजन है, जो उपवास को भी स्वाद से भर देता है।
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| कुट्टू के आटे की कुरकुरी पूरी और हरी चटनी |
आवश्यक सामग्री
(4 लोगों के लिए)
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कुट्टू का आटा – 2 कप
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उबले आलू – 2 (मैश किए हुए)
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सेंधा नमक – स्वादानुसार
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हरी मिर्च – 1 बारीक कटी हुई
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अदरक – 1 छोटा चम्मच (कद्दूकस किया हुआ)
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काली मिर्च – ½ चम्मच
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हरा धनिया – 1 बड़ा चम्मच (कटा हुआ)
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तेल – तलने के लिए
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पानी – आवश्यकता अनुसार
कुट्टू के आटे की पूरी बनाने की विधि
चरण 1:
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में कुट्टू का आटा छान लें। इसमें उबले हुए मैश किए आलू, सेंधा नमक, हरी मिर्च, अदरक, काली मिर्च और हरा धनिया मिलाएं।
चरण 2:
धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटे को सख्त गूंध लें। ध्यान रखें कि आटा ज्यादा नरम न हो, वरना पूरियाँ फट सकती हैं।
चरण 3:
अब आटे से छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और बेलन से हल्की दबाव में बेल लें। चूंकि कुट्टू का आटा बिना ग्लूटन के होता है, इसलिए बेलते समय चिपकने से बचाने के लिए बेलन या हाथों में हल्का तेल लगा सकते हैं।
चरण 4:
कढ़ाही में तेल गरम करें। एक-एक पूरी को सुनहरा होने तक तलें। गैस की आंच मध्यम रखें ताकि पूरी अंदर तक कुरकुरी और पकी हुई बने।
चरण 5:
तली हुई पूरियों को टिश्यू पेपर पर निकालें ताकि अतिरिक्त तेल सोख लिया जाए।
स्वाद और पोषण का मेल
कुट्टू के आटे में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। व्रत के समय यह शरीर को ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता।
उबले हुए आलू मिलाने से पूरी मुलायम भी बनती है और स्वाद में भी भरपूर होती है। चाहें तो इसमें जीरा पाउडर, हिंग या नींबू रस की कुछ बूँदें भी मिलाई जा सकती हैं।
व्रत में पूरी को परोसने के बेहतरीन तरीके
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कुट्टू की पूरी को दही और आलू की व्रत वाली सब्जी के साथ परोसें।
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अरबी की सब्जी, फलाहारी चटनी या खीरे-टमाटर के सलाद के साथ भी इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।
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मखाने की खीर या साबूदाना खिचड़ी के साथ संयोजन में यह पूरी एक संपूर्ण व्रत थाली बन जाती है।
उपयोगी सुझाव और सावधानियाँ
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आटा गूंधने के तुरंत बाद पूरियाँ बेलें और तलें, वरना आटा सख्त हो सकता है।
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पानी कम मात्रा में ही डालें, क्योंकि उबले आलू में पहले से नमी होती है।
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तलने का तेल अच्छा गरम होना चाहिए, नहीं तो पूरियाँ तेल सोख लेंगी।
✅ FAQs (प्रश्न-उत्तर फॉर्मेट):
प्रश्न 1: क्या कुट्टू की पूरी व्रत में खाई जा सकती है?
उत्तर:
हाँ, कुट्टू का आटा व्रत में मान्य होता है। यह फलाहारी आहार में शामिल है और बिना अनाज के होने के कारण उपवास के लिए आदर्श है।
प्रश्न 2: कुट्टू के आटे की पूरी तलते समय फट क्यों जाती है?
उत्तर:
यदि आटा बहुत नरम हो या अच्छे से गूंथा न गया हो तो पूरियाँ फट सकती हैं। साथ ही बेलते समय ध्यान रखें कि पूरी बहुत पतली न हो।
प्रश्न 3: कुट्टू के अलावा कौन-सा आटा व्रत में उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर:
राजगिरा का आटा, सिंघाड़े का आटा और साबूदाना व्रत में उपयोग के लिए उपयुक्त होते हैं।
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